You are here
Home > Miscellaneous > आधार डाटा को एअरटेल ने चुराया ;खाताधारक परेशान:आधार की विश्वसनीयता खतरे में

आधार डाटा को एअरटेल ने चुराया ;खाताधारक परेशान:आधार की विश्वसनीयता खतरे में

नई दिल्ली : जिस आधार को सरकार नागरिकों का और अपने डिजीटल इंडिया के लिए एक मजबूत आधार मान कर चल रही है। अब वही आधार का डाटा बेआधार हो चला है। जी हां जहां एक और  आधार डाटा लीक मामले में सरकार एक दैनिक अखबार के पत्रकार पर डाटा लीक की खबर का खुलासा करने पर उसके उपर एफआइआर दर्ज कर भले ही एस बात से इंकार करें की आधार का डाटा लीक नही हो सकता और यह खबर गलत है। तो सरकार की इस दावे को एक और आधार डाटा लीक का मामला झूठलाता है। यह ताजा मामला दिल्ली का है। दिल्ली में एक टीचर का बैंक खाता जो पूर्व में उसके आधार के साथ उसके बैंक से लिंक था। उसको एक मोबाइल कंपनी एअरटेल ने मोबाइल को आधार से लिंक कराने के नाम पर टीचर का आधार नम्बर मांगा और उसके नम्बर देने के बाद मोबाइल कंपनी एअरटेल ने उसके बैंक खाते के आधार लिंक को तोड़ते हुए अपनी एअरटेल बैंक से लिंक कर लिया? नतीजा उक्त टीचर के बैंक खाते में उसका वेतन आना ही बंद हो गया। इस बात की जानकारी टीचर को उस समतय हुई जब उसके एअरटेल नम्बर पर जून 2017 मे मैसेज आया की आपके खाते में आपका वेतन क्रेडिट हुआ है। यह देख टीचर के होश उड़ गए की उसके बैंक खाते की बजाए यह पैसे उसके मोबाइल बैंक में कैसे आ गए। जब इसकी जानकारी एअरटेल से लेने की कोशिस की गई तो कंपनी काा पहले तो संपर्क करने का कोई नम्बर था ही नही। लेकिन जब कंपनी के मेल पर संपर्क कर इसका विरोध किया गया तो कंपनी ने 1 अगस्त 2017 को अपने यहां से बैंक लिंक को इनएक्टिव कर दिया जो की विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की बेबसाइट पर साफ देखा जा सकता है। अब हालात यह हो गये की टीचर जुलाई 2017 से बैंक और अपने विभाग के धक्के खा रही है। लेकिन उसका पिछले 6 माह का वेतन अभी तक उसके खाते में नही आ पाया है। केनरा बैंक उसको अपने कंप्यूटर में उसका आधार नम्बर दिखा कर उसको टरका देता है। तो उसका विभाग जो की दिल्ली सरकार के अधीन आता है यह कहते हुए पल्ला झाड़ लेता है की हम तो केंद्र सरकार के आदेश का पालन कर रहें हैं हम तो आधार नम्बर के माध्यम से ही वेतन भेज रहें है। आप बैंक से संपर्क करों। नतीजा टीचर पिछले 6 माह से नौकरी तो कर रही है। लेकिन सरकार के आधार और डीजीटल युग के फेर में फंसकर वेतन नही ले पा रही है। आखिर टीचर जाए तो कहां जाए उसके इस आर्थिक,मानसिक और सामाजिक नुकसान की भरपाई आखिर कौन करेगा।

Leave a Reply