पटना/नई दिल्ली: बिहार विधानसभा की चुनावी राजनीति में यह चुनौती हमेशा से रही है कि कोई दल लगातार किसी सीट पर जीत दर्ज करता रहे। राज्य की सियासी तस्वीर बताती है कि ऐसी सीटों की संख्या कम है, लेकिन जहां दलों ने लगातार जीत का सिलसिला कायम रखा है, वहां विपक्ष के लिए जमे जमाए समीकरण को तोड़ना बेहद मुश्किल साबित हुआ है, चाहे वो नीतीश कुमार की पार्टी JDU हो या तेजस्वी यादव की पार्टी RJD।
57 सीटों पर चुनावी हैट्रिक
2010 विधानसभा चुनाव में एनडीए को दो-तिहाई बहुमत हासिल हुआ था। उसके बाद से अब तक तीन चुनाव हो चुके हैं और इस दौरान कई सीटों पर एक ही दल ने जीत की हैटट्रिक लगाई है। आंकड़े बताते है कि 57 सीटों पर लगातार तीन चुनावों से एक ही दल काबिज है।
जीत की हैट्रिक में सबसे आगे बीजेपी
सबसे आगे भारतीय जनता पार्टी (BJP) है, जिसने 24 सीटों पर लगातार जीत दर्ज की है। जेडीयू 23 सीटों पर और आरजेडी 10 सीटों पर पिछले तीन चुनावों से विजयी होती रही है।
2015 में जब जेडीयू और आरजेडी ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा तो समीकरण बदले। मगर 2020 में जेडीयू-बीजेपी फिर साथ आए और इसका असर परिणामों पर साफ दिखा।
डबल शॉट वाली 115 सीटें
सीटों पर लगातार दूसरी बार जीत का ग्राफ देखें तो 115 सीटें ऐसी है, जहां दलों ने दो चुनावों से कब्जा जमाया है। इसमें आरजेडी सबसे आगे रहा है, जिसने 38 सीटों पर लगातार दो बार जीत हासिल की है। ये भी कह सकते हैं कि एक ही सीट पर लगातार दो बार जीत कर आरजेडी ने डबल विनिंग शॉट लगा रखा है।
56 सीटों पर अब तक जीत से दूर रही आरजेडी
आरजेडी बिहार की सियासत में सबसे बड़ी ताकतों में गिनी जाती रही है। लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में पार्टी ने 1997 से अब तक छह विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया। इनमें तीन बार आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बावजूद राज्य की 56 सीटें ऐसी है, जहां आरजेडी अब तक जीत का स्वाद नहीं चख सकी। इनमें से कई सीटें ऐसी भी है जहां गठबंधन की मजबूरी में पार्टी ने कभी उम्मीदवार नहीं उतारा।
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